दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विद्यार्थी विरोध प्रदर्शन में गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को केंद्र सरकार की वार्ता की पेशकश को खारिज कर दिया गया। विद्यार्थी संगठन ने स्पष्ट किया कि वार्ता या तो जंतर-मंतर पर हो या किसी तटस्थ स्थान पर। संगठन ने 24 जुलाई को पुलिस कार्रवाई के खिलाफ देशव्यापी शांतिपूर्ण विरोध का आह्वान किया है।
प्रधानमंत्री की घोषणा
प्रधानमंत्री ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की कि सरकार पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करेगी। उन्होंने कहा, "हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं! हमने पेपर लीक में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का निर्णय लिया है।"
विद्यार्थी संगठन का रुख
विद्यार्थी संगठन ने प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फास्ट-ट्रैक अदालतें पेपर लीक के बाद की कार्रवाई तो करेंगी, लेकिन पेपर लीक होने के कारणों पर ध्यान देना बड़ा मुद्दा है। संगठन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी पहलू
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज की हैं। इस बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है, जिसमें विरोध प्रदर्शन की जांच की मांग की गई है।
देशभर में समर्थन
केरल में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। तमिलनाडु में भी फिल्म निर्देशक के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ। महाराष्ट्र में सामाजिक कार्यकर्ता ने मौन विरोध किया।
प्रदर्शनकारियों की शिकायतें
प्रदर्शनकारियों ने शिकायत की कि विरोध स्थल पर इंटरनेट सेवा बाधित की गई है और पुलिस उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि वे केवल उन छात्रों को रोक रहे हैं जो विरोध स्थल पर जा रहे हैं, क्योंकि वहां धारा 144 लागू है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्षी नेताओं ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को नष्ट किया गया है और छात्रों की मांगें पूरी की जानी चाहिए।
Comments ()
No comments yet. Be the first to share your thoughts!