रायगढ़ जिले में भारी बारिश और बाढ़ ने गणेश चतुर्थी से कुछ हफ्ते पहले हजारों मूर्तिकारों को बर्बाद कर दिया है। लगभग 3 लाख से अधिक मिट्टी की मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिनमें से कई को बेचा नहीं जा सकता।
कारीगरों का संघर्ष
रायगढ़ में लगभग 20,000 कार्यशालाएं हैं जो हर साल 80 लाख मूर्तियां बनाती हैं। इस उद्योग में 1.5 लाख लोगों को मौसमी रोजगार मिलता है और सालाना 3.5 अरब रुपये का कारोबार होता है। इस बार बाढ़ ने 3,000 कार्यशालाओं को प्रभावित किया है।
मूर्तिकार दिलीप म्हात्रे ने 5 लाख रुपये मूल्य की 500 मूर्तियां खो दीं। उन्होंने कहा, "बाढ़ ने सब कुछ बहा दिया। हमारे पास न मूर्तियां हैं, न सांचे, न कच्चा माल।" उनके परिवार की तीन दशकों से यही एकमात्र आय थी।
बीमा और राहत
कुछ कारीगरों के पास बीमा था, लेकिन मुआवजा अपर्याप्त है। 53 वर्षीय अनिता पाटिल ने बताया कि 10 लाख रुपये के नुकसान पर बीमा से केवल 10,000 रुपये मिलने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और सरकारी नियमों के अनुसार वित्तीय सहायता का वादा किया है।
भविष्य की तैयारी
कारीगर अब स्थायी प्लास्टिक छत, ऊंचे प्लेटफॉर्म और मजबूत बाधाओं की योजना बना रहे हैं। हालांकि, गणेश चतुर्थी नजदीक होने के कारण तत्काल ध्यान बचाई जा सकने वाली मूर्तियों को सुखाने और मरम्मत पर है। कई कारीगरों को एडवांस रिफंड करने या दूसरी जगहों से मूर्तियां मंगाने पर विचार करना पड़ रहा है।
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