पाकिस्तान की राजनीति में जेल, अदालत और सत्ता का रिश्ता हमेशा बेहद उलझा हुआ रहा। अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर पैदा हुआ नया विवाद इसी पुराने राजनीतिक पैटर्न की याद दिला रहा है। 18 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद इमरान खान को अस्पताल ले जाने का आदेश दिया। इसके दो दिन बाद सरकार ने संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें इलाज के लिए विदेश भी भेजा जा सकता है, लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
नवाज शरीफ उस समय भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल की सजा काट रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और मेडिकल आधार पर राहत का रास्ता खुला। फरवरी 2019 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल आधार पर उनकी जमानत याचिका खारिज की थी, लेकिन बाद के महीनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर मामला फिर गंभीर हुआ। अक्तूबर-नवंबर 2019 में उन्हें मेडिकल आधार पर जमानत मिली और इलाज के लिए विदेश जाने का रास्ता तैयार हुआ। नवंबर 2019 में पाकिस्तान सरकार ने नवाज शरीफ को इलाज के लिए चार सप्ताह के लिए विदेश जाने की एक बार की अनुमति दी थी। सरकार ने इसके लिए एक क्षतिपूर्ति बांड की शर्त भी रखी थी। बाद में लाहौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद विदेश जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और नवाज शरीफ लंदन चले गए। उनके साथ उस समय उनके भाई शहबाज शरीफ भी थे। यानी 2019 का घटनाक्रम सीधे तौर पर जेल से शुरू होकर मेडिकल जांच, अदालत की राहत और फिर विदेश में इलाज तक पहुंचा था। आज इमरान खान के मामले में भी जेल से अस्पताल और फिर संभावित विदेश इलाज की बात सामने आई है। यही समानता दोनों मामलों को एक साथ देखने की वजह बन रही है।
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। 20 अगस्त को पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिया कि अगर इमरान खान के इलाज के लिए जरूरत पड़ी तो उन्हें विदेश भेजने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने साफ किया कि इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यानी अभी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि इमरान खान को लंदन या किसी दूसरे देश भेजा जा रहा है। सरकार की बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल में बंद किसी बड़े राजनीतिक नेता को विदेश इलाज के लिए भेजना केवल मेडिकल फैसला नहीं रहता। इसमें अदालत, जेल प्रशासन, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी जुड़ जाती है। नवाज शरीफ के मामले में भी विदेश जाने के लिए अदालत और सरकार के स्तर पर कई कानूनी कदम उठे थे। उनके लिए पहले मेडिकल आधार पर राहत मिली और फिर विदेश जाने की अनुमति की प्रक्रिया पूरी हुई थी। इसलिए इमरान के मामले में अभी सबसे सही बात यही है कि विदेश इलाज का विकल्प खुला बताया गया है, लेकिन उसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अगर आगे अदालत या सरकार की ओर से औपचारिक अनुमति मिलती है, तभी इसे नवाज शरीफ वाले घटनाक्रम की अगली कड़ी माना जा सकेगा।
इमरान खान अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटे थे। इसके बाद उनके खिलाफ कानूनी मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी। 2023 में तोशाखाना मामले में उन्हें सजा हुई और गिरफ्तारी के बाद उनकी जेल यात्रा शुरू हुई। बाद में राज्य के गोपनीय दस्तावेज से जुड़े साइफर मामले, तोशाखाना, विवाह से जुड़े मामले और अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 2025 में उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 14-14 साल की सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े लाभ के बदले सरकारी धन की वापसी के मामले में भ्रष्टाचार हुआ। इमरान खान ने आरोपों से इनकार किया है और उनकी पार्टी लगातार कहती रही है कि उनके खिलाफ मामले राजनीतिक उद्देश्य से चलाए गए हैं। इमरान की जेल में बने रहने की वजह यह भी है कि किसी एक मामले में राहत मिलने के बाद दूसरे मामले में कानूनी कार्रवाई सामने आती रही। यही पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति की सबसे बड़ी जटिलता है। किसी नेता को एक मामले में जमानत मिल जाने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वह तुरंत जेल से बाहर आ जाए।
इमरान खान पाकिस्तान के पहले पूर्व प्रधानमंत्री नहीं हैं जिन्हें जेल या हिरासत का सामना करना पड़ा। देश के राजनीतिक इतिहास में कई बड़े प्रधानमंत्रियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ ऐसा हुआ है। पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक सूची में प्रधानमंत्रियों का लंबा इतिहास दर्ज है, जबकि अलग-अलग ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कई पूर्व प्रधानमंत्रियों को गिरफ्तार या नजरबंद किया गया। हुसैन शहीद सुहरावर्दी को 1962 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 में गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई। बेनजीर भुट्टो को भी अलग-अलग दौर में नजरबंदी और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा। नवाज शरीफ कई बार सत्ता में आए और उन्हें भी गिरफ्तारी, जेल और निर्वासन का सामना करना पड़ा।
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