फिल्म धुरंधर का तूफान और मिडिल ईस्ट की शांति के बाद आखिर यश की फिल्म टॉक्सिक आज यानी 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई यह 3 घंटे 15 मिनट की गैंगस्टर फिल्म 1947 से 1967 के बीच की एक भव्य और हिंसक दुनिया दिखाती है. इस फिल्म को लेकर रिव्यू आना शुरू हो गए है. वहीं फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने अपने ही अंदाज में एक पोस्ट किया है.
गौरतलब है कि इस साल धुरंधर 2 और टॉक्सिक के बीच क्लैश होने वाला था. इसे लेकर रामगोपाल वर्मा ने एक नहीं कई पोस्ट किए थे. आखिरकार टॉक्सिक मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का नाम लेकर पोस्टपोन हो गई. अब एक बार फिर राम गोपाल वर्मा का पोस्ट आया है.
राम गोपाल वर्मा का तंज राम गोपाल वर्मा ने अपने चित-परिचित अंदाज में टॉक्सिक पर बिना नाम लिए तंज कसा है. उन्होंने पोस्ट कर लिखा, 'अब #धुरंधर फिर से देख रहा हूं.'
पहले भी लिख चुके राम गोपाल वर्मा हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब राम गोपाल वर्मा ने टॉक्सिक के सामने धुरंधर की तारीफ की हो. इससे पहले क्लैश को लेकर उन्होंने लंबी और तीखी पोस्ट शेयर की थी. वर्मा ने इस क्लैश को सिनेमा के दो बिल्कुल अलग विचारों के बीच टकराव बताया था – एक जो असलियत और नतीजों पर आधारित है, और दूसरा जो स्टाइल और एटीट्यूड से प्रेरित है.
Now watching #Dhurandhar again .
#Dhuroxic हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए, वर्मा ने आदित्य धर की फिल्म को 'कारण, प्रभाव और परिणाम' पर बनी फिल्म बताया, जिसमें हिंसा दिखावे के लिए नहीं, बल्कि नैतिक, मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक होती है. उनके अनुसार, ऐसी फिल्मों में किरदार जरूरत के हिसाब से काम करते हैं, न कि इसलिए कि उन्हें कूल दिखना है; और कहानी कहने का तरीका ऐसे समझदार दर्शकों को ध्यान में रखकर अपनाया जाता है जो खामोशी और बेचैनी को भी समझ सकें.
. #Dhuroxic on March 19th will be the ultimate clash between ultra realistic cinema and ultra unrealistic cinema D is built on cause , leading to effect and consequence. It reveals that violence has moral, psychological, and political foundations. The Characters act because they…
इसके उलट, वर्मा ने गीतू मोहनदास की फिल्म को ऐसा सिनेमा बताया था, जिसमें 'लॉजिक से ज्यादा स्टाइल को अहमियत दी जाती है.' उनका तर्क था कि इसमें हिंसा मुख्य रूप से एटीट्यूड दिखाने के लिए होती है और कहानी में कोई गहराई नहीं जोड़ती.
राम गोपाल वर्मा ने इस दौरान यश के कैरेक्टर पर भी सवाल उठाया था. उन्होंने लिखा था, 'टॉक्सिक' में यश के किरदार का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने आगे सवाल उठाया कि क्या दर्शक स्लो-मोशन में दिखाए गए 'डार्क हीरो' (गंभीर या नकारात्मक शेड वाले हीरो) को पसंद करते रहेंगे, और क्या स्टाइलिश शॉट्स में स्मोकिंग करने को अब भी गहराई या गंभीरता समझा जाएगा?'
खैर, जो भी हो.. राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट में टॉक्सिक शब्द का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनका इशारा साफ समझा जा सकता है कि वो क्या कहना चाह रहे हैं.
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!