यूपी के सबसे बुजुर्ग विधायक आलम बदी आजमी का निधन हो गया है। 90 वर्षीय आलम बदी ने आजमगढ़ के कुर्मी टोला स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। बीमार चल रहे विधायक का लंबे समय से लखनऊ के अस्पताल में इलाज भी चल रहा था। सबसे ईमानदार विधायकों में भी उनकी गिनती होती थी। समाजवादी पार्टी से आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से पांच बार विधायक रहे। वह सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। गुरुवार शाम चार बजे शहर के हर्रा की चुंगी जामेतुरशाद स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया जाएगा।
अपनी ईमानदार छवि के चलते ही पूर्वांचल ही नहीं पूरे यूपी में उन्होंने खास पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर से सपा समेत अन्य दलों के नेताओं ने भी शोक जताया है। घर पर संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने निधन पर शोक जताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आज़मगढ़ की निज़ामाबाद विधानसभा सीट से लोकप्रिय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल अत्यंत दुखद है। भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो। स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि आलम बदी का निधन प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।
आलम बदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ के बिन्दवल गांव में हुआ था। उन्होंने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। वह अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए जाने जाते थे। वर्ष 1996 में वह पहली बार निजामाबाद सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2002, 2012, 2017, और 2022 में इसी सीट से विधायक बने। बीच में एक बार 2007 में बसपा की लहर में अंगद यादव से हार का सामना करना पड़ा था। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के मनोज यादव को 34,187 मतों से हराकर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे थे।
एक बार विधायक बनते ही लोग लग्जरी गाड़ियों के काफिले और बंगले में रहने लगते हैं। लेकिन आलम बदी पांच बार विधायक रहने के बाद भी शहर के कुर्मीटोला मोहल्ले में एक साधारण पुराने टीनशेड के घर में रहते थे। वीआईपी गाड़ियों के बजाय अक्सर रोडवेज बसों और साइकिल/स्कूटर पर सफर करते थे। साठ सालों से सक्रिय राजनीति में होने के बावजूद उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। उनके चुनाव प्रचार में बहुत ही कम राशि खर्च होती थी। समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्हें कई बार मंत्री पद की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि वह जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। आलम बदी के परिवार में उनकी पत्नी कुदसिया खान, 6 बेटे और 1 बेटी के अलावा बहुएं, पौत्र और पौत्रियां हैं।
आलम बदी के निधन पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उनके साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए गहरा दुख जताया है। महाना ने अपने शोक संदेश में कहा कि आलम बदी जी का निधन प्रदेश की राजनीति एवं सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा सामाजिक सरोकारों के प्रति उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और जनकल्याण के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
उन्होंने दिवंगत पुण्यात्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों, समर्थकों के साथ उनके असंख्य शुभचिंतकों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
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