Ram Mandir Controversy: राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर सबसे ज्यादा आरोपों में घिरे रहे ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के साथ ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा को एसआईटी की क्लीन चिट मिल गई है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में दोनों का नाम नहीं है। शासन को सौंपी गई यह रिपोर्ट अब आगे की कार्यवाही के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दी गई है। सूत्रों का कहना है कि फाइनल रिपोर्ट में केवल आठ लोगों का ही नाम है जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। चोरी का मामला सामने आने के बाद सबसे ज्यादा आरोप चंपत राय और अनिल मिश्रा पर ही लगे थे। इसके बाद ही दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित दूसरी एसआईटी अभी मामले की जांच कर रही है।
राम मंदिर में दान चोरी का मामला सबसे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को उठाया था। इसके जवाब में चंपत राय ने वीडियो शेयर कर आरोपों को गलत बता दिया था। इसके बाद भी अखिलेश के हमले जारी रहे। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह जमीन घोटालों को लेकर पहले से चंपत राय पर हमलावर रहे। लगातार बढ़ते दबाव के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय एसआईटी में आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार ने जांच सौंपी गई थी।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से चोरी की पुष्टि भी हो गई। यह भी पता चला कि बिना पुलिस को सूचना दिए ही करीब 80 लाख रुपयों की बरामदगी भी कराई गई है। इससे अखिलेश यादव के आरोप भी पुष्ट हुए और चंपत राय पर दबाव बढ़ गया। इसी दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। एसआईटी ने 23 जून को शासन को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। इसी आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत अन्य अज्ञात पर रिपोर्ट हुई थी। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि अभी तक अज्ञात की पहचान नहीं कराई जा सकी है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 बार नकदी छिपाकर ले जाते हुए कर्मचारियों की गतिविधियां दर्ज थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ट्रस्ट और एसबीआई की संयुक्त मानक कार्यप्रणाली का पालन नहीं हुआ। प्रवेश-निकास पर तलाशी भी नहीं ली जाती थी।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को तेजी से जांच पूरी करने और उसे सही नतीजे तक पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने एसआईटी को अपनी जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने कहा कि ‘जांच रिपोर्ट पर गहन विचार करने के बाद मंदिर में आने वाले भक्तों द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन में सुधार के लिए यह अदालत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।’
पीठ ने कहा कि एसआईटी द्वारा यूपी सरकार को सौंपी गई स्थिति रिपोर्ट को फिलहाल सावर्जनिक नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा ‘हम याचिकाकर्ताओं या किसी भी दूसरे नेक नीयत वाले और जनहित की भावना रखने वाले व्यक्ति को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के कार्यालय में सुझाव देने की अनुमति देते हैं।
सुझाव उन पहलुओं पर हो सकते हैं जिनकी एसआईटी द्वारा गहराई से जांच की जानी चाहिए। सॉलिसिटर जनरल मेहता का कार्यालय सुझावों को विचार के लिए एसआईटी को भेज देगा। हमें इसमें शक नहीं है कि इन सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाएगा।’
पीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया कि ‘वह तेजी से मामले की जांच करें और उसे सही निष्कर्ष तक पहुंचाएं। पीठ ने एसआईटी को जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार के लिए कोर्ट के सामने अलग-अलग याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों पर निष्पक्ष रूप से भी विचार करने का निर्देश दिया।
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