उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पीएनबी की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों की जांच में अब आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के निशाने पर है। निलंबित प्रबंधक अमित के बेहद करीबी बताए जा रहे एक कर्मचारी की संपत्ति और गतिविधियों को लेकर एनआईए जांच कर रही है। खास बात यह सामने आई है कि करीब 11 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाला यह कर्मचारी खुद चालक की ड्यूटी करने के बजाय करीब 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दूसरा ड्राइवर रखे हुए था।
कर्मचारी की तैनाती करेंसी चेस्ट में चालक और लोडर के रूप में थी, लेकिन आरोप है कि वह अधिकांश समय चेस्ट के भीतर ही रहता था और निलंबित प्रबंधक अमित के निजी सहायक की तरह काम करता था। जांच एजेंसियों को उसकी संपत्ति को लेकर भी कई सवाल मिले हैं। उसके पास पांच मकान, स्कॉर्पियो और वरना कार समेत दो बाइक होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन संपत्तियों और वाहनों का वास्तविक स्वामित्व अभी जांच का विषय है। एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी कम आय वाले कर्मचारी के पास कथित तौर पर इतनी संपत्ति और वाहन कैसे आए और इनके लिए धन का स्रोत क्या था। बुधवार को पुलिस ने मानकमऊ स्थित उसके आवास पर छापा मारकर दस्तावेज और अन्य जानकारी जुटाई। जांच एजेंसियां कर्मचारी और निलंबित प्रबंधक के बीच संबंधों के साथ ही करेंसी चेस्ट में उसकी वास्तविक भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
करेंसी चेस्ट से जुड़े कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में जांच का दायरा अब निलंबित प्रबंधक अमित कुमार के निजी सहायक आदेश कुमार तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। एनआइए की जांच में आदेश की चल-अचल संपत्तियों से जुड़ी जानकारियां सामने आने के बाद उसकी संपत्ति और आय के स्रोत को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। निजी कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले आदेश के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति होने की जानकारी ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आदेश कुमार ने इतनी बड़ी संपत्ति किस तरह अर्जित की। संपत्तियों की खरीद में खर्च रकम, भुगतान के माध्यम, बैंक खातों में हुए लेनदेन और आय के घोषित स्रोतों का मिलान किए जाने की संभावना है। जांच का अहम पहलू यह भी है कि कहीं उसकी संपत्तियों और करेंसी चेस्ट से जुड़े कथित वित्तीय मामले के बीच कोई संबंध तो नहीं है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आदेश के पास कई महंगी और लग्जरी गाड़ियां होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में आने-जाने के दौरान उसके वाहन अक्सर बदलते थे। अलग-अलग गाड़ियों से पहुंचने की जानकारी के बाद अब वाहनों की खरीद, स्वामित्व और भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल आदेश कुमार की संपत्तियों का करेंसी चेस्ट में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ी से कोई सीधा संबंध आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है। हालांकि, संपत्ति और आय में किसी तरह की असंगति मिलती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। निलंबित प्रबंधक अमित कुमार पहले से जांच के केंद्र में हैं। ऐसे में उनके करीबी बताए जा रहे आदेश की संपत्तियों की पड़ताल ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आदेश के पास कई महंगी गाड़ियां होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह करेंसी चेस्ट में अलग-अलग वाहनों से आता-जाता था। ऐसे में वाहनों की खरीद और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल उसकी संपत्तियों का करेंसी चेस्ट प्रकरण से कोई सीधा संबंध आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है। जांच आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट होगा कि इन संपत्तियों का वास्तविक स्रोत क्या है और मामले में आदेश की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
करेंसी चेस्ट पर जांच एजेंसी की सक्रियता का असर अब बैंकिंग व्यवस्था के नकदी प्रबंधन पर भी दिखाई देने लगा है। घंटाघर के सोफिया मार्किट और गंगोह स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट पर एनआईए की निगरानी के बीच शाखाओं ने नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी शुरू कर दी है। अब करेंसी चेस्ट से सीधे कैश मिलने पर निर्भर रहने के बजाय जरूरतमंद शाखाएं आसपास की दूसरी शाखाओं से रकम मंगाकर भुगतान व्यवस्था को सुचारु बनाए रख रही हैं। नकदी के आवागमन और वितरण को लेकर बढ़ी सतर्कता के बीच शाखाओं के बीच आपसी समन्वय भी बढ़ गया है। जिस शाखा में कैश की मांग बढ़ रही है, वहां उपलब्धता के आधार पर दूसरी शाखाओं से रकम स्थानांतरित की जा रही है। इससे ग्राहकों की रोजमर्रा की जमा-निकासी और भुगतान संबंधी जरूरतों पर तत्काल असर पड़ने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
पीएनबी करेंसी चेस्ट का चालक आदर्श बुधवार रात पूछताछ के बाद अपने घर लौट आया। वह पांच सितंबर से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता था। जानकारी के अनुसार पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए अपने साथ लिया था। उससे करेंसी चेस्ट और वहां मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के संबंध में जानकारी जुटाई गई। प्राथमिक पूछताछ में उसकी भूमिका सामने नहीं आने पर फिलहाल उसे छोड़ दिया गया। आदर्श के घर लौटने से परिजनों ने राहत की सांस ली है। उधर, जाली नोट प्रकरण की जांच जारी है और जांच एजेंसियां करेंसी चेस्ट से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका तथा लेनदेन समेत अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
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