आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 740 अंक से अधिक गिरकर 74,160 के आसपास आ गया, जबकि NSE निफ्टी 50 करीब 250 अंक गिरकर 23,231 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार खुलने के शुरुआती पांच मिनट में ही BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 6 लाख करोड़ घटकर 478 लाख करोड़ रुपये रह गया।
गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार बिकवाली देखने को मिली, BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 1.5% तक टूट गए।
भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय ब्रेंट क्रूड का 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचना है। यमन स्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच लड़ाई तेज होने से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए आयात बिल बढ़ने के साथ महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है।
जियोजीत के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, मध्य पूर्व संघर्ष बढ़ने के साथ बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। उनके अनुसार अगर ब्रेंट की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रहती है या और बढ़ती है तो भारत की GDP ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर इसका असर पड़ सकता है।
अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी चिंता का विषय है। शुक्रवार को यह 4.98% तक पहुंच गई। यील्ड बढ़ने का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है, क्योंकि अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने पर विदेशी निवेशकों के लिए शेयरों के मुकाबले बॉन्ड अधिक आकर्षक हो सकते हैं।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने भी बाजार की धारणा खराब की है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने तथा हूती विद्रोहियों की गतिविधियां लाल सागर और उसके आसपास बढ़ने से बाजार को डर है कि तेल की सप्लाई पर असर सिर्फ एक समुद्री रास्ते तक सीमित नहीं रहेगा।
भारतीय IPO बाजार में इस समय जबरदस्त गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कई इश्यू में भारी सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग गेन की उम्मीद ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
विजयकुमार के मुताबिक, IPO बाजार में जा रहा पैसा सेकेंडरी मार्केट से भी निकल रहा है। इसका मतलब है कि कुछ निवेशक पहले से मौजूद शेयर बेचकर नए IPO में पैसा लगा रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ सकती है।
अमेरिका में महंगाई से जुड़े आंकड़ों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है और ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर उस पर बनी हुई है। अगस्त का PPI 0.4% बढ़ा, जबकि जुलाई के आंकड़े को संशोधित कर 0.1% की बढ़ोतरी दिखाई गई।
रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता: शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 27 पैसे कमजोर होकर 95.79 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की तेजी भारत के लिए दोहरा दबाव पैदा कर सकती है।
सिर्फ भारत नहीं, दुनिया भर के बाजार दबाव में हैं। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी कमजोर रहे, डॉउ जोंस और एसएंडपी 500 करीब 0.6%, जबकि नैस्डैक कंपोजिट करीब 0.65% गिरा। MSCI का ग्लोबल इंडेक्स भी 0.66% नीचे रहा। एशियाई बाजारों में गिरावट और ज्यादा रही, जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी करीब 3% तक टूटे।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!