सहारनपुर, प्रणव अग्रवाल: यूपी के सहारनपुर में 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी के बाद अब 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्कों के खेल ने जिले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। तीतरों क्षेत्र में चल रही नकली सिक्कों की फैक्ट्री का खुलासा कर पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी छह रुपये की लागत से 20 रुपये का सिक्का तैयार कर लेते थे। फिर 12-15 रुपये में बेच देते थे। फिर सिक्का बाजार में वास्तविक मूल्य में चल जाता था।
नेपाल और थाईलैंड से लेकर भारत के कई राज्यों में फैले नकली सिक्कों के नेटवर्क ने अब उत्तर प्रदेश में अपना पहला मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर तैयार कर लिया था। इस पुराने नेटवर्क ने इस बार अपना फोकस उत्तर प्रदेश पर किया था। सहारनपुर के तीतरों में पकड़ी गई फैक्ट्री में सिर्फ नकली सिक्के तैयार करने की व्यवस्था नहीं थी, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए पूरा सेटअप खड़ा किया जा चुका था। छह मशीनों से रोज 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता विकसित की गई थी। मौके से 6400 तैयार सिक्के, करीब पांच लाख रुपये के अधबने सिक्के और 59 डाई की बरामदगी ने नेटवर्क की तैयारी की तस्वीर साफ कर दी।
इस नेटवर्क का कनेक्शन नया नहीं है। मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नाम वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में भी सामने आया था। उस समय उसके संपर्क नेपाल और थाईलैंड तक मिले थे। पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपे उपकार ने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब वर्षों बाद उसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र यूपी के सहारनपुर में तैयार किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है।
पुलिस के मुताबिक नकली सिक्कों के इस नेटवर्क में करीब आठ लोग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। किसी का काम मशीन और उत्पादन से जुड़ा था तो कोई तैयार माल को एजेंटों तक पहुंचाने में लगा था। कुछ लोग बाजार में सिक्कों को खपाने की व्यवस्था देखते थे। गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर रखा था। एक व्यक्ति के पकड़े जाने पर पूरा नेटवर्क सामने न आए। लेकिन पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब बाकी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। आठ मोबाइल और सात रजिस्टर पुलिस के हाथ लगे हैं। इन्हीं के आधार पर लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की जानकारी कर रही है।
नकली सिक्कों के इस कारोबार में मुनाफे का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये खर्च होते थे। तैयार सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये तक में बेचे जाते थे। इसके बाद एजेंट इन्हें बाजार में वास्तविक मुद्रा के रूप में चलाते थे। कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को कारोबार का आधार बनाया।
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