दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। नेपाल से आने वाली कोसी नदी का पानी लगातार बढ़ने से प्रखंड की नौ पंचायतों में से तीन पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। केवटगामा, कोला टोका और हरनाही पंचायत के निचले इलाकों में पानी भर गया है। बाढ़ के पानी से खेतों में लगी फसलें बर्बाद होने लगी हैं। वहीं, पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट भी गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को मवेशियों के लिए हरा चारा जुटाने के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है। ट्रैक्टर से दूर-दराज के इलाकों से हरा चारा लाकर किसी तरह पशुओं को खिलाया जा रहा है।
तीन पंचायतों में पहुंचा बाढ़ का पानी, प्रशासन अलर्ट
कुशेश्वरस्थान पूर्वी के सीओ राकेश रोशन भारती ने बताया कि फिलहाल प्रखंड की तीन पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें केवटगामा, कोला टोका और हरनाही पंचायत शामिल हैं। प्रभावित लोगों के लिए 10 नावों की व्यवस्था कराई गई है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सीओ ने कहा कि अगर बाढ़ का पानी और बढ़ता है तो प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति ऐसी नहीं है कि बड़े स्तर पर सामुदायिक रसोई शुरू करने की जरूरत पड़े। हालांकि, संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और संबंधित अधिकारी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं। मवेशियों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया जा रहा है।
चारे के लिए 20-25 किलोमीटर दूर जा रहे पशुपालक
बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद किसान और पशुपालक अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ऊंचे स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं। सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के चारे को लेकर सामने आ रही है। स्थानीय इलाकों में हरा चारा पानी में डूब जाने के कारण पशुपालकों को दूर-दराज के क्षेत्रों से चारा लाना पड़ रहा है। लोग ट्रैक्टर से 20 से 25 किलोमीटर दूर जाकर हरा चारा ला रहे हैं। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे भी खर्च करने पड़ रहे हैं। पशुओं को खिलाने की मजबूरी के कारण लोग यह खर्च उठाने को मजबूर हैं। चारे की बढ़ती समस्या ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है।
बांध पर ले रहे शरण, घरों में घुसा पानी
ग्रामीण संजय राय ने बताया कि अचानक कोसी नदी में बाढ़ का पानी बढ़ जाने से बांधों के बीच निचले हिस्से में बने कई घर डूब गए हैं। ऐसे में लोग अपने घर छोड़कर बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी मवेशियों के चारे को लेकर हो रही है। पशुओं के लिए काफी दूर से चारा लाना पड़ रहा है। वहीं, चंद्रकला देवी ने बताया कि बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिरे घरों में पानी घुस गया है। उनका कहना है कि अभी तक उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया है। अब लोगों को खाने-पीने की दिक्कत भी होने लगी है।
तेज धार से कटाव का खतरा
बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ नदी किनारे बसे लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। कई जगह नदी की तेज धार के कारण कटाव शुरू हो गया है। इससे आसपास के घरों पर भी खतरा मंडराने लगा है। संभावित खतरे को देखते हुए स्थानीय लोग अपनी नावों की मरम्मत कराने और उन्हें सुरक्षित रखने में जुट गए हैं। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर नावों की संख्या बढ़ाने के साथ प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। फिलहाल बढ़ते जलस्तर, फसल बर्बादी, चारे की कमी और कटाव ने कुशेश्वरस्थान पूर्वी के ग्रामीणों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!