Saharanpur Blast: सहारनपुर की पटाखा फैक्ट्री में जबरदस्त विस्फोट के बाद भयावह मंजर सामने आया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि मृतकों के शरीर के टुकड़े करीब एक किलोमीटर दूर तक बिखर गए। खेतों, पेड़ों और झाड़ियों में मानव शरीर के हिस्से मिले। पुलिस, फोरेंसिक विशेषज्ञ और स्वास्थ्य विभाग की टीम घंटों तक घटनास्थल पर मानव अवशेष तलाशती रही। कई स्थानों पर कपड़े, जूते और शरीर के टुकड़े अलग-अलग पड़े मिले। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। राहत दल के कई सदस्य भी दृश्य देखकर सिहर उठे। प्रशासन ने डीएनए परीक्षण की संभावना को देखते हुए सभी अवशेष सुरक्षित रखवाए हैं।
गंगोह के कुंडाबसी स्थित पटाखा फैक्ट्री 20 बीघे में फैला विशाल परिसर है। कर्मचारियों और ग्रामीणों के अनुसार परिसर में पांच अलग-अलग भवन ऐसे थे, जहां भारी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखों का स्टॉक रखा गया था। शुक्रवार शाम हुए विस्फोट के बाद पूरा परिसर मलबे में बदल गया। कई भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गए और टीनशेड सैकड़ों मीटर दूर तक जा गिरे। प्रशासन जांच कर रहा है कि लाइसेंस के अनुरूप बारूद का भंडारण किया गया था या नहीं। अलग-अलग भवनों में विस्फोटक रखने के सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। अधिकारियों ने फैक्ट्री के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और लाइसेंस की शर्तों की जांच शुरू कर दी है। यदि निर्धारित मात्रा से अधिक विस्फोटक रखा गया पाया गया तो संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विस्फोट के कारणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और कुछ कर्मचारियों का दावा है कि जिस स्थान पर बारूद का मिश्रण तैयार हो रहा था, वहीं मोबाइल चार्ज किया जा रहा था। उनके अनुसार मोबाइल चार्जर में अचानक तेज स्पार्किंग या ब्लास्ट हुआ और उसी के बाद आग बारूद तक पहुंच गई। देखते ही देखते पूरा परिसर धमाकों से गूंज उठा। हालांकि प्रशासन ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। फोरेंसिक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है। अधिकारी यह भी जांच करेंगे कि क्या विस्फोट के समय वहां बिजली का उपयोग किया जा रहा था और क्या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों के अनुसार यहां सामान्य दिनों में करीब 200 श्रमिक कार्य करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिला मजदूर भी शामिल हैं। शुक्रवार को अधिकांश श्रमिक अवकाश पर थे और दैनिक मजदूरी करने वाली कई महिलाएं हादसे से करीब एक घंटा पहले काम खत्म कर घर लौट गई थीं। यदि सभी कर्मचारी मौजूद होते तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी। हादसे के समय फैक्ट्री के दूसरे हिस्से में करीब 20 मजदूर काम कर रहे थे, जिन्होंने धमाका होते ही किसी तरह जान बचाई।
हादसे के बाद फैक्ट्री की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि आग बुझाने के नाम पर परिसर में केवल चार अग्निशमन सिलेंडर रखे थे और उन पर भी जंग लगी हुई थी। विस्फोट के बाद इनमें से कोई भी उपयोग में नहीं आ सका। विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखा फैक्ट्री जैसी संवेदनशील इकाई में आधुनिक अग्निशमन प्रणाली, पर्याप्त पानी और प्रशिक्षित स्टाफ होना जरूरी है। प्रशासन फायर एनओसी और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच करेगा।
विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि करीब पांच किलोमीटर दूर तक लोगों ने इसे महसूस किया। ग्रामीणों ने बताया कि धमाके के साथ धरती तक कांप उठी। आसपास के मकानों की खिड़कियां हिल गईं और सड़क से गुजर रहे वाहन भी झटके से डगमगा गए। कई लोगों ने पहले इसे भूकंप समझा। कुछ ही मिनटों में गांव के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े, जहां चारों ओर धुआं, मलबा और अफरा-तफरी का माहौल था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट के बाद आसमान में बारूद और धुएं का विशाल गुबार उठा जो दूर-दूर तक दिखाई देता रहा। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसा लग रहा था मानो किसी ज्वालामुखी से आग और धुआं निकल रहा हो। कई मिनट तक काला धुआं पूरे इलाके में छाया रहा। विस्फोट के बाद लगातार छोटे-छोटे धमाके भी सुनाई देते रहे, जिससे बचाव दल को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ी।
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