पुडुचेरी में आज 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की वेतन, DA तथा पेंशन सुधार पर चर्चा होगी।
यह बैठक तमिलनाडु में दो दिवसीय राज्य दौरे के दौरान आयोजित की गई है। चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनर्स एसोसिएशन और अन्य प्रतिनिधि समूहों के साथ बैठकें हुई थीं।
9 सितंबर को आयोग पुडुचेरी पहुँचा, जहाँ केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। आयोग ने आधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया, परंतु कर्मचारी संगठनों द्वारा जमा किए गए ज्ञापनों के आधार पर मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक के मुख्य बिंदुओं में फिटमेंट फैक्टर में बदलाव, बेसिक पे के ढांचे में संशोधन, महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी, तथा HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्तों की समीक्षा शामिल हैं। ये सभी बदलाव कर्मचारियों की कुल सैलरी पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं।
पेंशनर्स के लिए पेंशन रिफॉर्म और रिटायरमेंट सिक्योरिटी भी प्रमुख मुद्दे हैं। कर्मचारी और पेंशनर संगठन चाहते हैं कि वेतन आयोग की सिफारिशों में रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा को पर्याप्त महत्व दिया जाए।
इसके अतिरिक्त, एम्प्लॉई वेलफेयर, कार्य परिस्थितियाँ, मनोबल और बेहतर सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे भी आयोग के सामने रखे जा सकते हैं। रेलवे, रक्षा और अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी अपनी समस्याएँ और सुझाव आयोग के सामने रखने की तैयारी में हैं।
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में पूर्व IAS अधिकारी पंकज जैन सदस्य‑सचिव और प्रोफेसर पुलक घोष सदस्य हैं।
इस आयोग की सिफारिशों से लगभग 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ होने की उम्मीद है, जिसमें लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं।
तमिलनाडु और पुडुचेरी के बाद आयोग का अगला पड़ाव चंडीगढ़ होगा, जहाँ 16 से 18 सितंबर तक पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के प्रतिनिधियों से मुलाकात प्रस्तावित है। इसके बाद 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में कर्नाटक के प्रतिनिधियों से बैठक होगी। मुंबई में रेलवे कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों को समझने के लिए दौरे की योजना है, हालांकि तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और उसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, यानी मई 2027 तक सिफारिशें सौंपनी हैं। इसके बाद सरकार के स्तर पर मंजूरी और लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस प्रकार चेन्नई और पुडुचेरी जैसी बैठकों का कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को आयोग तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान है।
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