बिहार में सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में हुई गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। कैमूर में अगस्त 2025 के दौरान 201 शिक्षकों के खातों में दोहरा वेतन भुगतान होने से 93 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि चली गई थी। विभाग अब इसकी वसूली में जुटा है। वहीं, भागलपुर और बांका जिलों में अतिरिक्त वेतन निकासी के 43 मामलों में 1.22 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। दोनों जिलों से अब तक 67.61 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए जा चुके हैं। इसके अलावा भागलपुर के करीब 350 अन्य शिक्षक भी निर्धारित वेतन से अधिक भुगतान की आशंका के चलते जांच के दायरे में हैं।
कैमूर में 201 शिक्षकों को मिला दोहरा वेतन, 93 लाख की रिकवरी
कैमूर जिले में वर्ष 2025 में 201 शिक्षकों की पदोन्नति विशिष्ट शिक्षक से प्रधान शिक्षक के पद पर हुई थी। पद परिवर्तन के बाद अगस्त महीने का वेतन जारी करते समय विभागीय स्तर पर चूक हो गई। इसके कारण इन शिक्षकों के खातों में प्रधान शिक्षक के वेतन के साथ विशिष्ट शिक्षक का वेतन भी हस्तांतरित कर दिया गया। इस तरह कुल 93 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि शिक्षकों के खातों में पहुंच गई।
जांच समिति कर रही वेतन अभिलेखों का मिलान
बिहार के विभिन्न जिलों में वेतन भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं पर कार्रवाई शुरू होने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर कैमूर में भी जांच समिति गठित की गई थी। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही विभाग ने वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है। हालांकि, कुछ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने दावा किया है कि उनके संस्थान में किसी शिक्षक को दोहरा भुगतान नहीं हुआ है। इसके समर्थन में उन्होंने विभाग को प्रमाणपत्र भी सौंपे हैं। अब विभाग इन प्रमाणपत्रों का वेतन अभिलेखों से मिलान कर रहा है। इसके साथ ही वर्ष 2014-15 से 2019-20 के बीच हड़ताल की अवधि में हुए भुगतान से जुड़ी शिकायतों की भी जांच की जा रही है।
एनपीएस की राशि वापस मांगने पर शिक्षकों ने उठाए सवाल
कैमूर में रिकवरी की कार्रवाई शुरू होने के बाद प्रभावित शिक्षकों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) की राशि वापस मांगे जाने पर आपत्ति जताई है। शिक्षकों का कहना है कि अगस्त महीने में उनके खातों में वेतन की राशि दो बार जरूर आई थी, लेकिन एनपीएस का अंशदान केवल एक बार ही जमा हुआ था। ऐसे में जब एनपीएस की राशि दोहराई ही नहीं गई, तो उसकी वसूली करना उचित नहीं है। शिक्षकों ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
भागलपुर और बांका में 43 मामलों में 1.22 करोड़ की वसूली
उधर, भागलपुर प्रमंडल में सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त वेतन निकासी से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई तेज है। क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के अनुसार, भागलपुर और बांका जिलों में चिह्नित 43 मामलों में कुल 1.22 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। इसमें से अब तक 67.61 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं, जबकि शेष 55.26 लाख रुपये की वसूली के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। भागलपुर जिले में अतिरिक्त वेतन निकासी के 31 मामले सामने आए हैं। इनमें 1.04 करोड़ रुपये की वसूली योग्य राशि तय की गई है। विभाग अब तक 53.43 लाख रुपये वसूल चुका है, जबकि 51.24 लाख रुपये की रिकवरी प्रक्रियाधीन है। वहीं, बांका जिले में ऐसे 12 मामले चिह्नित किए गए हैं। इनमें कुल 18.20 लाख रुपये की वसूली होनी थी। अब तक 14.18 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा कराए जा चुके हैं और 4.01 लाख रुपये की वसूली बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक, ये आंकड़े फिलहाल औपबंधिक रिपोर्ट पर आधारित हैं। अंतिम समीक्षा के बाद विस्तृत प्रतिवेदन उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा।
फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख के गबन की जांच
भागलपुर में अतिरिक्त वेतन निकासी के मामलों के साथ ही फर्जी शिक्षिका तनुश्री के नाम पर हुए कथित वित्तीय गबन की भी तकनीकी जांच की जा रही है। इस मामले में 98.12 लाख रुपये के कथित गबन की बात सामने आई है। विभागीय कार्रवाई के तहत संबंधित बैंक खाते में मौजूद 46.87 लाख रुपये की राशि को तत्काल प्रभाव से होल्ड यानी फ्रीज करा दिया गया है। इस मामले के मुख्य आरोपित संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब आरोपित के परिवार के सदस्यों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि गबन की गई शेष सरकारी राशि को जल्द से जल्द राजकोष में वापस जमा कराया जा सके।
भागलपुर के 350 अन्य शिक्षक भी जांच के दायरे में
विभाग की जांच अब पहले से चिह्नित मामलों तक सीमित नहीं है। भागलपुर जिले के करीब 350 ऐसे शिक्षकों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है, जिनमें तकनीकी या लिपिकीय त्रुटि के कारण निर्धारित वेतन स्लैब से अधिक राशि जाने की आशंका है। फिलहाल इन शिक्षकों की सूची संभावित है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के स्तर पर विस्तृत जांच और अभिलेखों की पड़ताल के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विभाग की शिक्षकों से अपील, अतिरिक्त भुगतान हुआ है तो लौटाएं
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों से अपील की है कि यदि उनके बैंक खाते में निर्धारित देय राशि से अधिक वेतन आया है, तो वे नियमानुसार अतिरिक्त राशि तत्काल वापस जमा कर दें। विभाग का कहना है कि ऐसा करने से अनावश्यक विभागीय कार्रवाई या पेनल्टी से बचा जा सकता है। बिहार के अलग-अलग जिलों में वेतन भुगतान की गड़बड़ियों की जांच और वसूली की कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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