उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड में स्थित बरेली केवल झुमका नगरी के रूप में नहीं, बल्कि नाथ नगरी, बरेली शरीफ और जरी नगरी के नामों से भी जानी जाती है। यह शहर अपनी प्राचीन विरासत, धार्मिक स्थल, पारम्परिक उद्योग और राजनीतिक पहचान के कारण प्रदेश में विशिष्ट स्थान रखता है।
बरेली का इतिहास प्राचीन काल तक जाता है। आंवला तहसील के रामनगर गांव के पास अहिच्छत्र के बड़े पैमाने पर पुरातात्विक अवशेष मिले हैं, जिन्हें उत्तरी पांचाल की राजधानी माना जाता है। गुप्त काल से पहले के लगभग पाँच हजार सिक्के तथा द्वितीय सहस्राब्दी ईसा‑पूर्व से लेकर 11वीं शताब्दी ईस्वी तक के विभिन्न वस्तुएँ इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता का प्रमाण हैं। तिहार‑खेड़ा, पचौमी, रहटुईया, कादरगंज और सेंथल जैसे स्थानों पर भी प्राचीन टीले मिले हैं। महाभारत की मान्यताओं में बरेली को पांचाल प्रदेश और द्रौपदी की जन्मभूमि कहा गया है, जबकि स्थानीय जनश्रुति में गौतम बुद्ध के अहिच्छत्र में आगमन का भी उल्लेख मिलता है।
आधुनिक बरेली का जन्म 1537 में माना जाता है। जगत सिंह कठेरिया के दो पुत्र—बंसलदेव और बरलदेव—के नाम पर शहर की स्थापना हुई, जिससे "बांस‑बरेली" नाम उत्पन्न हुआ। बरेली का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ा है; खिलाफत आंदोलन के दौरान यहाँ कांग्रेस की सक्रियता बढ़ी और महात्मा गांधी ने दो बार बरेली का दौरा किया। 26 जनवरी 1930 को सविनय अवज्ञा आंदोलन यहाँ शुरू हुआ, जबकि 1936 में आचार्य नरेंद्र देव के अध्यक्षता में कांग्रेस सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें जवाहरलाल नेहरू, एम. एन. रॉय, पुरुषोत्तम दास टंडन और रफ़ी अहमद किदवई जैसे नेताओं ने भाषण दिया। बरेली जेल में नेहरू, रफ़ी अहमद किदवई और महावीर त्यागी जैसे राष्ट्रीय नेताओं को बंद किया गया था।
धार्मिक पहचान के मामले में बरेली को "नाथ नगरी" और "बरेली शरीफ" के रूप में जाना जाता है। यहाँ अल्ला हजरत (इमाम अहमद रजा खान, 1856‑1921) की दरगाह स्थित है, जो इस्लामी विद्वान, सूफ़ी और धार्मिक सुधारक के रूप में प्रसिद्ध हैं। जिला प्रशासन की पर्यटन वेबसाइट के अनुसार, दरगाह अल्ला हजरत, दरगाह हजरत शाह शराफ़त मियां और खानकाह‑ए‑नियाज़िया भी इस क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
बरेली का आर्थिक स्वरूप जरी‑जरदोजी, फर्नीचर उद्योग और बांस व्यापार से जुड़ा है। लोकप्रिय गाना "झुमका गिरा रे" ने इस शहर को "झुमका नगरी" के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
सांस्कृतिक क्षेत्र में बरेली का योगदान भी उल्लेखनीय है। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और दिशा पाटनी के बरेली से जुड़ाव, उर्दू शायर वसीम बरेलवी की रचनाएँ, तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) और केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (CARI) जैसे वैज्ञानिक संस्थानों की उपस्थिति शहर को बहुआयामी पहचान देती है।
राजनीतिक रूप से बरेली में कई प्रमुख चेहरे उभरे हैं। संतोष गंगवार, जो कई बार बरेली लोकसभा सीट से सांसद रहे, वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल हैं; उनकी बेटी को भाजपा ने राज्यसभा का सदस्य बनाया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने छत्रपाल सिंह गंगवार को टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। विधानसभा स्तर पर 2022 के चुनावों में भाजपा के धर्मपाल सिंह, डॉ. अरुण कुमार, संजीव अग्रवाल और डॉ. डी. सी. वर्मा सहित कई नेताओं ने जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के अताउर रहमान और शहजिल इस्लाम अंसारी भी विजयी रहे।
बरेली में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं: बहेड़ी, मीरगंज, भोजीपुरा, नवाबगंज, फरीदपुर (SC), बिथरी‑चैनपुर, बरेली, बरेली कैंट और आंवला। प्रत्येक सीट के हालिया परिणाम संक्षेप में इस प्रकार हैं:
- आंवला: भाजपा के धर्मपाल सिंह ने जीत हासिल की; सपा के पंडित राधा कृषण शर्मा दूसरे स्थान पर रहे।
- नवाबगंज: डॉक्टर एम. पी. आर्य (भाजपा) ने सपा के भगवत सरन गंगवार को हराया।
- फरीदपुर (SC): भाजपा के श्याम बिहारी लाल ने जीत दर्ज की; बीएसपी, सपा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी प्रतिस्पर्धा में रहे।
- बरेली: डॉक्टर अरुण कुमार (भाजपा) विजयी रहे; सपा, बीएसपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने मुकाबला किया।
- बरेली कैंट: संजीव अग्रवाल (भाजपा) ने जीत हासिल की; सपा, बीएसपी और कांग्रेस के उम्मीदवार उपस्थित थे।
- बहेड़ी: भाजपा के छत्रपाल सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जबकि सपा के अताउर रहमान ने जीत हासिल की।
- बिथरी‑चैनपुर: भाजपा के राधवेंद्र शर्मा ने जीत दर्ज की; सपा, बीएसपी और कांग्रेस के उम्मीदवार भी रहे।
- भोजीपुरा: सपा के शहजिल इस्लाम अंसारी ने जीत हासिल की; 2017 में यहाँ भाजपा के बहोरन लाल मौर्या जीते थे।
- मीरगंज: डॉक्टर डी. सी. वर्मा (भाजपा) ने जीत हासिल की; सपा, बीएसपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने मुकाबला किया।
इतिहास, धर्म, उद्योग, संस्कृति और राजनीति के सभी पहलुओं को मिलाकर बरेली एक बहु‑आयामी शहर के रूप में उभरा है, जो अपनी विरासत को संजोते हुए आधुनिक विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
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