अगर आप भी शेयरों और म्यूचुअल फंडों में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। कभी कम समय में शेयरों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाते हैं या कभी लंबे समय में संपत्ति बनाने के लिए पैसा लगाते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश किस तरह की संपत्ति में है। इन निवेशों से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन्स टैक्स भी लग सकता है, अगर मुनाफा सरकार की तय की गई सीमा से ज्यादा हो।
नया आयकर अधिनियम, 2025, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले टैक्स वर्षों पर लागू होगा। कैपिटल गेन्स का ढांचा मोटे तौर पर वही रहेगा, लेकिन प्रावधानों की नंबरिंग बदल दी गई है। लिस्टेड शेयर और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड 12 महीने की होल्डिंग अवधि के बाद लॉन्ग-टर्म ट्रीटमेंट के लिए पात्र माने जाते हैं।
टैक्स की देनदारी कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे आपका इन्वेस्टमेंट किस प्रकार का है, उसे कितने समय तक रखा गया और कौन-से टैक्स नियम लागू होते हैं। यहां एक उदाहरण के जरिए समझिए कि शेयरों या म्यूचुअल फंडों से शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म गेन्स की गणना के साथ ₹3 लाख का मुनाफा होने पर निवेशक को कितना टैक्स देना पड़ सकता है।।
सीए संतोष मिश्र ने इसे ऐसे समझाया, ‘मान लीजिए, आपने ₹10 लाख के शेयर खरीदे और कुछ समय बाद उन्हें ₹13 लाख में बेच दिया। इस मामले में आपका कैपिटल गेन ₹3 लाख होगा। लिस्टेड इक्विटी शेयरों में, जहां लागू सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तें पूरी होती हैं, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। हालांकि, एक वित्त वर्ष में LTCG के पहले ₹1.25 लाख पर टैक्स नहीं लगता।’
मिश्र ने कहा कि उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक ने ₹10 लाख के शेयर खरीदे और 12 महीने से ज्यादा रखने के बाद उसे कैपिटल गेन ₹3 लाख हुआ। इस पर ₹1.25 लाख की सालाना टैक्स छूट के बाद शेष रकम पर 12.5% टैक्स बनेगा, लेकिन अगर वही ₹3 लाख का कैपिटल गेन लिस्टेड इक्विटी शेयरों को 12 महीने से कम समय तक रखकर बेचने से होता है, तो उसे शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा। ऐसे शेयरों पर STCG पर सीधा 20% टैक्स लगता है। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन की तरह, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर ₹1.25 लाख की सालाना टैक्स छूट लागू नहीं होती।
उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक ने ₹10 लाख के शेयर खरीदे और 12 महीने से कम रखने के बाद उन्हें ₹13 लाख में बेचा, तो यह मानते हुए कि कोई सरचार्ज नहीं है, टैक्स की गणना इस तरह होगी। ₹3 लाख का मुनाफा लॉन्ग-टर्म या शॉर्ट-टर्म गेन होने के हिसाब से करीब ₹22,750 या ₹62,400 टैक्स ला सकता है।
म्यूचुअल फंड के गेन पर टैक्स का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि फंड किस तरह का है, उसे कितने समय तक रखा गया और कैपिटल गेन्स के कौन-से नियम लागू होते हैं। इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड और दूसरी म्यूचुअल फंड स्कीमों पर टैक्स अलग-अलग तरह से लग सकता है, इसलिए निवेशक को टैक्स देनदारी निकालने से पहले फंड की कैटेगरी पहचाननी चाहिए।
इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड के लिए नियम मोटे तौर पर लिस्टेड इक्विटी शेयरों जैसे ही हैं। 12 महीने से ज्यादा समय तक रखी गई यूनिट्स पर मुनाफे को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है, जबकि 12 महीने या उससे कम समय तक रखी गई यूनिट्स पर गेन को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर मिलने वाली ₹1.25 लाख की छूट इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड पर भी लागू होती है। किसी स्कीम को इक्विटी MF तब माना जाता है जब वह अपनी कुल संपत्ति का 60% से ज्यादा हिस्सा अलग-अलग कंपनियों के इक्विटी शेयरों में निवेश करती है।
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