उत्तर प्रदेश के देवरिया में 4 लोगों की अवैध हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त रुख सामने आया है। इस मामले में बुधवार को हाई कोर्ट ने देवरिया के एसपी और गौरीबाजार थाने के एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसएचओ से कथित अवैध हिरासत की अवधि 13 अप्रैल से 23 अप्रैल के दौरान की सीसीटीवी फुटेज रिकॉडिंग के बारे में बार-बार सवाल किए। इस मामले में 2 सितंबर को राज्य की ओर से दावा किया गया था कि कथित घटना से पहले के दिनों में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सिस्टम में खराबी थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को फटकार लगाते हुए राज्य सरकार को 3 याचिकाकर्ताओं को 20-20 हजार और एक याचिकाकर्ता को 5 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। न्यायालय ने निर्देश दिया कि कुल 65 हजार रुपए का मुआवजा एसएचओ की सैलरी से वसूल किया जाएगा।
‘लाइव लॉ इंडिया’ पोर्टल की एक रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने सीसीटीवी कैमरों, सिस्टम की कथित खराबी और कथित हिरासत की अवधि (13 अप्रैल से 23 अप्रैल) के दौरान की रिकॉर्डिंग गायब होने के बारे में पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों पर निराशा व्यक्त की। सुनवाई के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब न्यायालय ने इस बारे में दिए गए तर्कों को मौखिक रूप से झूठों का पुलिंदा कहा।
हाई कोर्ट की पीठ एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि 4 याचिकाकर्ताओं को गौरीबाजार पुलिस थाने में 13 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच गैरकानूनी हिरासत में रखा गया। इनमें से कुछ को कथित तौर पर लगभग 10 दिनों तक और अन्य को कम अवधि के लिए हिरासत में रखा गया। इससे पहले न्यायालय ने याचिका में कही गई बातों की सच्चाई का पता लगाने के लिए थाने के अंदर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग पेश करने का निर्देश दिया था।
इस मामले में 2 सितंबर को राज्य की ओर से दावा किया गया था कि कथित घटना से पहले के दिनों में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के सिस्टम में खराबी थी। इस दलील के बाद कोर्ट ने एसपी देवरिया और एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसएचओ से लापता सीसीटीवी फुटेज के बारे में बार-बार सवाल किए। पीठ ने पूछा कि यदि कैमरा 14 अप्रैल से चालू था तो रिकॉर्डिंग कहा है?
से मिली जानकारी के अनुसार गौरीबाजार क्षेत्र के बैतालपुर स्थित एक रेस्टोरेंट में 12 अप्रैल 2026 को सोपरी के रहने वाले पप्पू यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में तीन दिन बाद पुलिस ने 4 आरोपियों को जेल भेज दिया था। जबकि 23 अप्रैल को रंजीत और मुलायम गोड़ को भगुआ ढाला के पास से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसमें से रंजित के पास से अवैध पिस्टल, कारतूस और बाइक की बरामदगी दिखाई गई थी। आरोप लगा कि पुलिस इस मामले में कई लोगों को थाने में बैठाई रही। मामले में महेंद्र गौर और तीन अन्य लोगों की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि 4 लोगों को अलग-अलग अवधि के लिए अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।
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