मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में शिपिंग को लेकर बढ़ती चिंताओं ने दुनियाभर के तेल बाजार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैच ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले और शिपिंग में समस्या बढ़ती है, तो ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
बैंक के ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के सह-प्रमुख डैन स्ट्रुवेन के मुताबिक, हालिया घटनाओं से यह चिंता बढ़ी है कि शिपिंग में व्यवधान और ज्यादा लंबे समय तक रह सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका के चलते कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
तनाव उस समय और बढ़ गया, जब अमेरिका ने ईरान के तीन ऑयल टैंकरों पर हमला करने की बात कही। इससे पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दो अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए थे। इसके बाद ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी कि ईरान की आगे की जवाबी कार्रवाई पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और गंभीर हो सकती है। ईरान ने आने वाले दिनों में एक नए exclusion zone (exclusion zone) का ऐलान करने की भी बात कही है। यह क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की लाइन से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) होते हुए पर्शियन गल्फ (Persian Gulf) तक फैल सकता है। इससे इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों और वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
मंगलवार को भी तेल की कीमतों में तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर (Brent crude futures) करीब 1.25% बढ़कर 98.30 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 2.30% चढ़कर 93.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। Brent पहले ही जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, इसलिए यहां लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और दूसरी ऊर्जा लागत भी प्रभावित हो सकती है।
अन्य एक्सपर्ट भी तेल की कीमतों में और तेजी की संभावना जता रहे हैं। जेपी मॉर्गन (JP Morgan) के अनुमान के मुताबिक, शिपिंग में व्यवधान जितने लंबे समय तक चलेगा, ब्रेंट (Brent) की कीमत में हर अतिरिक्त महीने करीब 7-8 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हो सकता है। अगर यह संकट तीन महीने तक जारी रहता है, तो औसत मासिक Brent कीमत करीब 114 डॉलर तक पहुंच सकती है। ANZ ने भी अपना शॉर्ट-टर्म ब्रेंट (Brent) अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर किया है और कहा है कि संघर्ष बढ़ने पर कीमत इससे ऊपर जा सकती है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है और पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन व अन्य वस्तुओं की लागत पर दबाव आ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक ब्रेंट (Brent) के लिए 90 डॉलर मजबूत सपोर्ट, जबकि 102 डॉलर अहम रेजिस्टेंस है। अगर कीमत 102 डॉलर के ऊपर टिकती है, तो 115-116 डॉलर की ओर तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं गोल्डमैन सैच (Goldman Sachs) का 120 डॉलर का अनुमान इस बात का संकेत है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में हालात आगे तेल बाजार के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं।
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